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भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) – Complete Notes

भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) – Complete Notes

संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) – complete notes

दोस्तों, जब आप कोई किताब खरीदते हैं, तो सबसे पहले उसका ‘पहला पन्ना’ (Preface) पढ़ते हैं जिससे पता चलता है कि किताब के अंदर क्या है। ठीक उसी तरह, हमारे संविधान का भी एक मुखौटा या परिचय पत्र है जिसे हम ‘प्रस्तावना’ (Preamble) कहते हैं।

इसे संविधान का सार (Summary) भी कहा जाता है। अगर किसी को पूरा संविधान नहीं पढ़ना, तो वो सिर्फ प्रस्तावना पढ़कर समझ सकता है कि भारत कैसा देश है।

आज हम प्रस्तावना के एक-एक शब्द का मतलब समझेंगे और उन सवालों को रटेंगे जो एग्जाम में बार-बार आते हैं।

संविधान की प्रस्तावना (Preamble Text in Hindi)

(इसे ध्यान से पढ़ें)

“हम, भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व-सम्पन्न समाजवादी पन्थ-निरपेक्ष लोकतन्त्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को:

सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतन्त्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता

प्राप्त कराने के लिए, तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखण्डता सुनिश्चित करने वाली बन्धुता बढ़ाने के लिए

दृढसंकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवम्बर 1949 ई॰ (मिति मार्गशीर्ष शुक्ल सप्तमी, संवत 2006 विक्रमी) को एतद्द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।”

1. प्रस्तावना कहाँ से आई? (Origin)

  • विचार (Idea): सबसे पहले प्रस्तावना का विचार अमेरिका (USA) के संविधान से लिया गया।
  • भाषा (Language): प्रस्तावना की भाषा ऑस्ट्रेलिया के संविधान से प्रेरित है।
  • आधार: 13 दिसंबर 1946 को जवाहरलाल नेहरू ने जो ‘उद्देश्य प्रस्ताव’ (Objective Resolution) पेश किया था, वही आगे चलकर हमारी प्रस्तावना बना।

2. प्रस्तावना के मुख्य शब्द (Keywords Meaning)

संविधान की शुरुआत होती है इन शब्दों से: “हम भारत के लोग…” (We, the People of India)। इसका मतलब है कि संविधान की असली शक्ति जनता के हाथ में है।

आइए, प्रस्तावना के भारी-भरकम शब्दों को आसान भाषा में समझें:

शब्द (Keyword)अर्थ (Meaning)
संप्रभु (Sovereign)भारत अपने फैसले खुद लेगा। कोई बाहरी देश (जैसे अमेरिका या ब्रिटेन) हम पर हुक्म नहीं चला सकता।
समाजवादी (Socialist)सरकार का उद्देश्य अमीरी-गरीबी के फासले को कम करना और जन-कल्याण करना है।
पंथनिरपेक्ष (Secular)भारत का अपना कोई धर्म नहीं है। यहाँ हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सब बराबर हैं। सरकार धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं करेगी।
लोकतांत्रिक (Democratic)जनता का राज। हम वोट देकर अपनी सरकार खुद चुनते हैं।
गणतंत्र (Republic)हमारे देश का मुखिया (राष्ट्रपति) वंशानुगत नहीं होगा (राजा का बेटा राजा नहीं बनेगा), बल्कि चुनाव के द्वारा आएगा।

3. प्रस्तावना में न्याय, स्वतंत्रता और समानता

प्रस्तावना हमें तीन चीजें देने का वादा करती है:

  1. न्याय (Justice): 3 प्रकार का – सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक। (यह रूस की क्रांति से लिया गया है)
  2. स्वतंत्रता (Liberty): 5 प्रकार की – विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की।
  3. समानता (Equality): 2 प्रकार की – प्रतिष्ठा और अवसर की।

(स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व का नारा फ्रांस की क्रांति से लिया गया है)

4. क्या प्रस्तावना में बदलाव हो सकता है? (Amendment)

जी हाँ, हो सकता है। लेकिन अब तक इतिहास में सिर्फ एक बार बदलाव हुआ है।

  • 42वां संविधान संशोधन (1976): इंदिरा गांधी की सरकार के समय।
  • इसमें 3 नए शब्द जोड़े गए थे:
    1. समाजवादी (Socialist)
    2. पंथनिरपेक्ष (Secular)
    3. अखंडता (Integrity)

याद रखें: सुप्रीम कोर्ट ने केशवानंद भारती केस (1973) में कहा था कि प्रस्तावना संविधान का अभिन्न अंग है और इसमें संशोधन किया जा सकता है, लेकिन इसके ‘मूल ढांचे’ (Basic Structure) को नहीं बदला जा सकता।

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(इस टॉपिक से जितने भी सवाल बन सकते हैं, सब यहाँ हैं)

(A) कथन और विचार (Quotes)

  1. संविधान की प्रस्तावना को ‘संविधान का परिचय पत्र’ (Identity Card) किसने कहा? 👉 एन. ए. पालखीवाला (N.A. Palkhivala)
  2. प्रस्तावना को ‘हमारे दीर्घकालिक सपनों का विचार’ किसने कहा? 👉 सर अल्लादि कृष्णास्वामी अय्यर
  3. प्रस्तावना को ‘संविधान की जन्म-कुंडली’ (Horoscope) किसने कहा? 👉 के. एम. मुंशी (K.M. Munshi)
  4. प्रस्तावना को ‘संविधान की आत्मा’ (Soul of Constitution) किसने कहा? 👉 ठाकुरदास भार्गव (नोट: अगर डॉ. अंबेडकर के अनुसार पूछे, तो अनुच्छेद 32 को आत्मा कहा गया है, इसमें कन्फ्यूज न हों)।
  5. किसने कहा “प्रस्तावना अमेरिका की स्वतंत्रता की घोषणा के समान है”? 👉 एम. हिदायतुल्ला (पूर्व मुख्य न्यायाधीश)

(B) स्रोत और संशोधन (Sources & Amendments)

  1. प्रस्तावना का विचार किस देश से लिया गया? 👉 अमेरिका (USA)
  2. प्रस्तावना की भाषा (Language) किस देश से ली गई? 👉 ऑस्ट्रेलिया
  3. प्रस्तावना में ‘स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व’ के आदर्श किस क्रांति से लिए गए? 👉 फ्रांस की क्रांति (French Revolution, 1789)
  4. प्रस्तावना में ‘न्याय’ (सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक) का आदर्श किस क्रांति से लिया गया? 👉 रूस की क्रांति (Russian Revolution, 1917)
  5. प्रस्तावना में अब तक कितनी बार संशोधन हुआ है? 👉 केवल एक बार (1976 में)
  6. 42वें संशोधन द्वारा कौन से 3 शब्द जोड़े गए? 👉 समाजवादी, पंथनिरपेक्ष और अखंडता
  7. भारत को ‘गणतंत्र’ (Republic) क्यों कहा जाता है? 👉 क्योंकि यहाँ राज्य का प्रमुख (राष्ट्रपति) निर्वाचित होता है, वंशानुगत नहीं।

(C) सुप्रीम कोर्ट के फैसले (Supreme Court Cases)

  1. किस केस में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रस्तावना संविधान का अंग नहीं है? 👉 बेरुबारी यूनियन केस (1960)
  2. किस केस में सुप्रीम कोर्ट ने माना कि प्रस्तावना संविधान का अभिन्न अंग है? 👉 केशवानंद भारती केस (1973)
  3. किस केस में कहा गया कि प्रस्तावना ‘संविधान की मूल संरचना’ (Basic Structure) का हिस्सा है? 👉 एस. आर. बोम्मई केस (1994) और LIC ऑफ इंडिया केस (1995)

(D) बारीक सवाल (Deep Questions)

  1. प्रस्तावना में भारत शब्द का प्रयोग कितनी बार हुआ है? 👉 दो बार (“हम भारत के लोग, भारत को एक…”)
  2. प्रस्तावना में कितने प्रकार के न्याय (Justice) की बात की गई है? 👉 3 (सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक)
  3. प्रस्तावना में कितने प्रकार की स्वतंत्रता (Liberty) है? 👉 5 (विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म, उपासना)
  4. प्रस्तावना में कितने प्रकार की समानता (Equality) है? 👉 2 (प्रतिष्ठा और अवसर)
  5. क्या प्रस्तावना न्यायोचित (Justiciable) है? 👉 नहीं (यानी इसके आधार पर आप कोर्ट में जाकर सरकार को चुनौती नहीं दे सकते)।
  6. प्रस्तावना में संविधान को अंगीकृत करने की तारीख क्या है? 👉 26 नवंबर, 1949 (मिति मार्गशीर्ष शुक्ल सप्तमी, संवत 2006 विक्रमी)

निष्कर्ष (Conclusion) दोस्तों, प्रस्तावना संविधान की कुंजी है। अगर आप ऊपर दिए गए 21 One-Liners को याद कर लेते हैं, तो आपका काम बन जाएगा।