Parliament of India (Part-2): संसद के सत्र, कार्यवाही और विधायी प्रक्रिया – Complete Notes in Hindi
दोस्तों, संसद भवन सिर्फ ईंट-पत्थर की इमारत नहीं है, यह लोकतंत्र का मंदिर है। लेकिन इस मंदिर में काम कैसे होता है? वहां दिन भर क्या होता है? (प्रश्न काल/शून्य काल)।
अक्सर एग्जाम में “स्थगन और सत्रावसान में अंतर” या “शून्य काल क्या है” जैसे सवाल पूछे जाते हैं। आज के इस पोस्ट में हम संसद की कार्यप्रणाली (Working) को बिल्कुल आसान भाषा में समझेंगे।
1. संसद के सत्र (Sessions of Parliament – Art 85)
संसद साल भर खुली नहीं रहती। राष्ट्रपति समय-समय पर सांसदों को बुलाते हैं, जिसे ‘सत्र’ कहते हैं।
भारत में 3 सत्र होते हैं:
- बजट सत्र (Budget Session): (फरवरी से मई) – यह सबसे लंबा सत्र होता है।
- मानसून सत्र (Monsoon Session): (जुलाई से अगस्त/सितंबर)।
- शीतकालीन सत्र (Winter Session): (नवंबर से दिसंबर) – यह सबसे छोटा सत्र होता है।
नियम: संविधान के अनुसार, दो सत्रों के बीच 6 महीने से ज्यादा का गैप नहीं होना चाहिए। यानी साल में कम से कम 2 बार बैठक होना अनिवार्य है।
महत्वपूर्ण शब्दावली (Terminology):
(इनमें अंतर समझना बहुत जरूरी है)
| शब्द | अर्थ (Meaning) | कौन करता है? |
| आहूत (Summon) | सत्र को बुलाना (शुरू करना)। | राष्ट्रपति |
| सत्रावसान (Prorogation) | सत्र को समाप्त करना (पूरी बैठक खत्म)। | राष्ट्रपति |
| स्थगन (Adjournment) | बैठक को कुछ घंटों/दिनों के लिए रोकना (जैसे- लंच ब्रेक या हंगामे के कारण)। | स्पीकर / सभापति |
| विघटन (Dissolution) | लोकसभा को पूरी तरह भंग करना (फिर से चुनाव होंगे)। | राष्ट्रपति |
2. संसद की दैनिक कार्यवाही (Daily Proceedings)
संसद सुबह 11 बजे शुरू होती है और शाम तक चलती है। इसका टाइम-टेबल फिक्स होता है:
(A) प्रश्न काल (Question Hour) – 11:00 AM से 12:00 PM
सदन का पहला घंटा प्रश्न काल होता है। इसमें सांसद, मंत्रियों से सरकार के कामकाज पर सवाल पूछते हैं। प्रश्न तीन तरह के होते हैं:
- तारांकित प्रश्न (Starred): इसका जवाब मंत्री को बोलकर (Oral) देना होता है। इसके बाद पूरक प्रश्न (Cross Question) पूछे जा सकते हैं।
- अतारांकित प्रश्न (Unstarred): इसका जवाब मंत्री लिखित (Written) में देते हैं। इस पर बहस नहीं हो सकती।
- अल्प-सूचना प्रश्न: 10 दिन से कम नोटिस देकर पूछे जाने वाले सवाल।
(B) शून्य काल (Zero Hour) – 12:00 PM से 1:00 PM
यह दुनिया को भारत की देन है (1962 में मीडिया ने यह नाम दिया था)।
- यह प्रश्न काल के तुरंत बाद शुरू होता है।
- इसमें सांसद बिना किसी पूर्व सूचना (Notice) के देश के अति-महत्वपूर्ण मुद्दों पर सवाल उठा सकते हैं।
- इसे ‘शून्य काल’ इसलिए कहते हैं क्योंकि यह दोपहर के 12 बजे (Zero Hour) शुरू होता है।
(C) भोजन अवकाश (Lunch Break) – 1:00 PM से 2:00 PM
(D) विधायी कार्य (Law Making) – 2:00 PM के बाद
लंच के बाद असली काम शुरू होता है। इसमें बिल (Bill) पेश किए जाते हैं, बहस होती है, बजट पास होता है और वोटिंग होती है।
3. विधेयकों के प्रकार (Types of Bills)
संसद में कानून बनने के लिए 4 तरह के विधेयक (Bills) पेश किए जाते हैं। इनका अंतर समझना बहुत जरूरी है:
| विधेयक का प्रकार | अनुच्छेद | विवरण (Details) | विशेष नियम |
| 1. साधारण विधेयक (Ordinary Bill) | Art 107 | पैसे को छोड़कर किसी भी मामले पर कानून। | किसी भी सदन में पेश हो सकता है। राज्यसभा इसे 6 महीने तक रोक सकती है। |
| 2. धन विधेयक (Money Bill) | Art 110 | टैक्स लगाना, हटाना या संचित निधि से पैसा निकालना। | यह केवल लोकसभा में पेश होता है (राष्ट्रपति की अनुमति से)। राज्यसभा इसे सिर्फ 14 दिन रोक सकती है। |
| 3. वित्त विधेयक (Financial Bill) | Art 117 | यह भी पैसे से जुड़ा है लेकिन धन विधेयक से अलग है। | इसे पेश तो लोकसभा में करते हैं, लेकिन पास होने के लिए राज्यसभा की भी पूरी मर्जी चाहिए। |
| 4. संविधान संशोधन (Amendment Bill) | Art 368 | संविधान में बदलाव करने के लिए। | इसे दोनों सदनों से अलग-अलग पास होना जरूरी है। इस पर संयुक्त बैठक (Joint Sitting) नहीं हो सकती। |
सुपर नोट: कोई बिल ‘धन विधेयक’ है या नहीं, इसका अंतिम फैसला लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) करते हैं।
4. संसद के नियम
- कोरम (Quorum): संसद की बैठक शुरू करने के लिए कम से कम 1/10 सदस्य (लोकसभा में 55, राज्यसभा में 25) मौजूद होने चाहिए। अगर इससे कम हैं, तो घंटी बजती है और स्पीकर बैठक रोक देते हैं।
- व्हिप (Whip/सचेतक): हर पार्टी का एक ‘मॉनिटर’ होता है जिसे व्हिप कहते हैं। अगर वह आदेश दे कि “आज वोटिंग में आना है और ‘हाँ’ में वोट देना है”, तो सांसद को मानना ही पड़ेगा। अगर नहीं माना, तो उसकी सांसदी जा सकती है।
- लैमे-डक सत्र (Lame-Duck Session): जब नई लोकसभा चुनी जा चुकी हो, तो पुरानी लोकसभा का जो आखिरी सत्र होता है, उसे ‘लेम-डक’ कहते हैं। (जो सांसद दोबारा नहीं जीत पाए, उन्हें ‘लेम-डक’ कहा जाता है)।
5. विधायी प्रक्रिया: कानून कैसे बनता है? (Legislative Process)
किसी भी साधारण विधेयक (Ordinary Bill) को कानून बनने के लिए 3 चरणों (3 Readings) से गुजरना पड़ता है।
पहला चरण: प्रथम वाचन (First Reading)
- क्या होता है: मंत्री या सांसद सदन में खड़े होकर बिल पेश करने की अनुमति मांगते हैं।
- काम: यहाँ बिल पर कोई बहस नहीं होती। बस उसका शीर्षक (Title) और उद्देश्य बताया जाता है और उसे भारत के राजपत्र (Gazette) में छाप दिया जाता है।
- सारांश: यह सिर्फ ‘इंट्रोडक्शन’ है।
दूसरा चरण: द्वितीय वाचन (Second Reading)
(यह सबसे महत्वपूर्ण और सबसे लंबा चरण है)
- क्या होता है: यहाँ बिल की ‘चीर-फाड़’ होती है।
- विस्तृत जांच: बिल के एक-एक क्लॉज (Clause) पर बहस होती है।
- समिति को भेजना: अक्सर बिल को गहराई से जांचने के लिए ‘प्रवर समिति’ (Select Committee) के पास भेजा जाता है।
- संशोधन: विपक्ष इसमें बदलाव (Amendment) के प्रस्ताव रखता है। अगर सदन मान ले, तो बदलाव हो जाता है।
तीसरा चरण: तृतीय वाचन (Third Reading)
- क्या होता है: यहाँ अब कोई बदलाव नहीं होता।
- फैसला: सिर्फ ‘हाँ’ या ‘ना’ में वोटिंग होती है।
- अगर बहुमत मिल गया, तो बिल उस सदन से पास माना जाता है।
दूसरे सदन में प्रक्रिया
जब एक सदन (जैसे लोकसभा) बिल पास कर देता है, तो वह दूसरे सदन (राज्यसभा) में जाता है। वहां भी यही 3 चरण (Readings) होते हैं। दूसरा सदन 3 काम कर सकता है:
- बिल को पास कर दे।
- संशोधन करके वापस भेज दे।
- बिल को रोक ले (साधारण बिल को 6 महीने तक)।
राष्ट्रपति की मुहर (Assent of President)
दोनों सदनों से पास होने के बाद बिल राष्ट्रपति के पास जाता है।
- जैसे ही राष्ट्रपति साइन करते हैं, ‘विधेयक’ (Bill) बदलकर ‘अधिनियम’ (Act) बन जाता है।
गतिरोध और संयुक्त बैठक (Deadlock & Joint Sitting – Art 108)
अगर एक सदन बिल पास करे और दूसरा मना कर दे, तो झगड़ा (Deadlock) हो जाता है।
- समाधान: राष्ट्रपति अनुच्छेद 108 के तहत दोनों सदनों की संयुक्त बैठक (Joint Sitting) बुलाते हैं।
- अध्यक्षता: लोकसभा स्पीकर करते हैं।
- फैसला: चूँकि लोकसभा में ज्यादा मेंबर हैं, इसलिए आमतौर पर लोकसभा की ही जीत होती है।
- नोट: धन विधेयक और संविधान संशोधन पर संयुक्त बैठक नहीं हो सकती।
बजट प्रक्रिया (Budget Process)
संविधान के अनुच्छेद 112 में इसे ‘वार्षिक वित्तीय विवरण’ कहा गया है। बजट पास होने में 6 चरण लगते हैं:
Step 1: बजट की प्रस्तुति (Presentation)
- वित्त मंत्री लोकसभा में ‘बजट भाषण’ देते हैं। इस दिन कोई बहस नहीं होती।
Step 2: आम बहस (General Discussion)
- 3-4 दिन तक पक्ष और विपक्ष बजट की नीतियों पर भाषण देते हैं। अभी वोटिंग नहीं होती।
Step 3: विभागीय समितियों द्वारा जांच (Scrutiny)
- यह बहुत खास है। इसके बाद संसद 3 से 4 हफ्ते के लिए बंद हो जाती है।
- इस दौरान संसद की 24 विभागीय समितियां हर मंत्रालय (रेल, रक्षा, कृषि) की मांगों की बारीकी से जांच करती हैं और रिपोर्ट बनाती हैं।
Step 4: अनुदान की मांगों पर मतदान (Voting on Demands for Grants)
- संसद दोबारा मिलती है। अब हर मंत्रालय के खर्चे पर लोकसभा में वोटिंग होती है।
- कटौती प्रस्ताव (Cut Motions): विपक्ष पैसे कम करने के लिए प्रस्ताव लाता है:
- नीति कटौती (Policy Cut): “मांग को घटाकर ₹1 कर दिया जाए” (मतलब हमें पॉलिसी ही पसंद नहीं है)।
- आर्थिक कटौती (Economy Cut): “मांग में कुछ निश्चित राशि कम की जाए” (फिजूलखर्ची रोकने के लिए)।
- सांकेतिक कटौती (Token Cut): “मांग में ₹100 कम किए जाएं” (सिर्फ विरोध दर्ज कराने के लिए)।
- गिलोटिन (Guillotine): आखिरी दिन समय कम होने पर, बची हुई सभी मांगों को बिना चर्चा के एक साथ पास कर दिया जाता है। इसे ‘गिलोटिन’ कहते हैं।
Step 5: विनियोग विधेयक (Appropriation Bill – Art 114)
- यह सबसे जरूरी है। सरकार संसद की मंजूरी के बिना ‘संचित निधि’ (तिजोरी) से पैसा नहीं निकाल सकती।
- इस बिल के पास होने पर ही सरकार को खर्चा करने की पावर मिलती है।
Step 6: वित्त विधेयक (Finance Bill)
- विनियोग विधेयक ‘खर्च’ के लिए था, वित्त विधेयक ‘कमाई’ (Tax) के लिए है।
- टैक्स लगाने या हटाने के लिए यह बिल पास करना जरूरी है। इसके पास होते ही बजट प्रक्रिया पूरी हो जाती है।
लेखानुदान (Vote on Account)
बजट प्रक्रिया लंबी (फरवरी से मई) चलती है। लेकिन 1 अप्रैल से नया साल शुरू हो जाता है, तो अप्रैल-मई में सरकार खर्चा कैसे चलाएगी?
- इसके लिए सरकार संसद से 2 महीने के लिए एडवांस पैसा मांगती है। इसे ‘लेखानुदान’ (Vote on Account) कहते हैं (अनुच्छेद 116)।
प्रस्ताव (Motions) और संकल्प (Resolutions)
संसद में कोई भी सदस्य अपनी मर्जी से खड़े होकर कुछ भी नहीं बोल सकता। हर बात कहने का एक नियम होता है।
- अगर किसी को चर्चा शुरू करवानी है, तो वह ‘प्रस्ताव’ (Motion) लाता है।
- अगर सदन उस चर्चा के बाद कोई ‘राय’ या ‘फैसला’ सुनाता है, तो उसे ‘संकल्प’ (Resolution) कहते हैं।
1. प्रस्ताव और संकल्प में अंतर (Difference between Motion and Resolution)
यह कॉन्सेप्ट समझना बहुत जरूरी है:
“सभी संकल्प, प्रस्ताव होते हैं। लेकिन सभी प्रस्ताव, संकल्प नहीं होते।”
(All Resolutions are Motions, but all Motions are not Resolutions).
| आधार (Basis) | प्रस्ताव (Motion) | संकल्प (Resolution) |
| परिभाषा | यह सदन की चर्चा शुरू करने का एक ‘सुझाव’ या ‘माध्यम’ है। | यह प्रस्ताव का वह रूप है जिस पर सदन अपनी ‘राय’ (Opinion) या ‘फैसला’ सुनाता है। |
| वोटिंग | हर प्रस्ताव पर वोटिंग (मतदान) होना जरूरी नहीं है। | संकल्प पर वोटिंग होना अनिवार्य है। |
| वापसी | प्रस्ताव को आसानी से वापस लिया जा सकता है। | संकल्प को वापस लेने के लिए पूरे सदन की अनुमति चाहिए। |
| प्रकृति | यह प्रक्रियात्मक (Procedural) हो सकता है। | यह हमेशा सारभूत (Substantive) होता है (यानी इसका कुछ ठोस मतलब होता है)। |
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(संसद की कार्यवाही, विधायी प्रक्रिया और बजट का पूरा निचोड़)
(A) संसद के सत्र और शब्दावली (Sessions & Vocabulary)
- संसद के दो सत्रों के बीच अधिकतम कितना अंतराल हो सकता है? 👉 6 महीने।
- संसद का सत्र कौन ‘आहूत’ (Summon) करता है और ‘सत्रावसान’ (Prorogue) कौन करता है? 👉 राष्ट्रपति।
- चलती हुई बैठक को कुछ घंटों या दिनों के लिए ‘स्थगित’ (Adjourn) कौन करता है? 👉 लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) या राज्यसभा सभापति।
- लोकसभा को भंग (Dissolve) करने की शक्ति किसके पास है? 👉 राष्ट्रपति (PM की सलाह पर)।
- संसद का सबसे लंबा सत्र कौन सा होता है? 👉 बजट सत्र (फरवरी से मई)।
- संसद का सबसे छोटा सत्र कौन सा होता है? 👉 शीतकालीन सत्र (नवंबर-दिसंबर)।
- ‘लेम-डक सत्र’ (Lame-Duck Session) किसे कहते हैं? 👉 नई लोकसभा चुने जाने के बाद, पुरानी लोकसभा का जो अंतिम सत्र होता है।
- ‘लेम-डक’ (Lame-Duck) सदस्य कौन होते हैं? 👉 वे मौजूदा सांसद जो दोबारा चुनाव नहीं जीत पाए।
(B) संसद की कार्यवाही और नियम (Proceedings & Rules)
- संसद की बैठक शुरू करने के लिए ‘कोरम’ (Ganpurti) कितना होना चाहिए? 👉 कुल सदस्यों का 1/10 भाग (अनुच्छेद 100)।
- संसद का पहला घंटा (11-12 बजे) क्या कहलाता है? 👉 प्रश्न काल (Question Hour)।
- ‘तारांकित प्रश्नों’ (Starred Questions) का उत्तर कैसे दिया जाता है? 👉 मौखिक (Oral) रूप में (इसके बाद पूरक प्रश्न पूछे जा सकते हैं)।
- ‘अतारांकित प्रश्नों’ (Unstarred Questions) का उत्तर कैसे दिया जाता है? 👉 लिखित (Written) रूप में।
- ‘शून्य काल’ (Zero Hour) कब शुरू होता है? 👉 ठीक 12 बजे (प्रश्न काल के तुरंत बाद)।
- शून्य काल किस देश की संसदीय देन है? 👉 भारत की (1962 से)।
- सांसद किस काल में बिना पूर्व सूचना के मुद्दे उठा सकते हैं? 👉 शून्य काल में।
- ‘सचेतक’ (Whip) का मुख्य कार्य क्या है? 👉 अपनी पार्टी के सांसदों को सदन में उपस्थित रहने और वोटिंग का आदेश देना।
(C) विधेयक और विधायी प्रक्रिया (Bills & Legislative Process)
- साधारण विधेयक को राज्यसभा अधिकतम कितने समय तक रोक सकती है? 👉 6 महीने तक।
- धन विधेयक (Money Bill) को राज्यसभा अधिकतम कितने दिन रोक सकती है? 👉 14 दिन।
- कोई विधेयक ‘धन विधेयक’ है या नहीं, इसका निर्णय कौन करता है? 👉 लोकसभा अध्यक्ष (Speaker)।
- धन विधेयक किस अनुच्छेद में है? 👉 अनुच्छेद 110।
- बिल पास करने का सबसे महत्वपूर्ण और विस्तृत चरण कौन सा है? 👉 द्वितीय वाचन (Second Reading) – यहाँ खंड-दर-खंड चर्चा होती है।
- संयुक्त अधिवेशन (Joint Sitting) किस अनुच्छेद में है? 👉 अनुच्छेद 108।
- संयुक्त अधिवेशन कौन बुलाता है? 👉 राष्ट्रपति।
- संयुक्त अधिवेशन की अध्यक्षता कौन करता है? 👉 लोकसभा अध्यक्ष।
- अब तक कितनी बार संयुक्त बैठक हुई है? 👉 3 बार (दहेज 1961, बैंकिंग 1978, पोटा 2002)।
- क्या संविधान संशोधन विधेयक पर संयुक्त बैठक हो सकती है? 👉 नहीं (इसे दोनों सदनों से अलग-अलग पास होना जरूरी है)।
- विधेयक (Bill) कब ‘अधिनियम’ (Act) बनता है? 👉 जब उस पर राष्ट्रपति हस्ताक्षर कर देते हैं।
(D) बजट प्रक्रिया और निधियां (Budget & Funds)
- संविधान में ‘बजट’ के लिए किस शब्द का प्रयोग है? 👉 वार्षिक वित्तीय विवरण (Annual Financial Statement) – अनुच्छेद 112।
- बजट में सरकार को खजाने से पैसा निकालने की अनुमति कौन सा बिल देता है? 👉 विनियोग विधेयक (Appropriation Bill) – अनुच्छेद 114।
- टैक्स (Tax) लगाने या हटाने के लिए कौन सा बिल पास करना होता है? 👉 वित्त विधेयक (Finance Bill) – अनुच्छेद 117।
- बजट पास होने तक खर्चे के लिए एडवांस पैसा किस माध्यम से मिलता है? 👉 लेखानुदान (Vote on Account) – अनुच्छेद 116।
- ‘गिलोटिन’ (Guillotine) का क्या अर्थ है? 👉 समय की कमी के कारण बजट की मांगों को बिना चर्चा के पास कर देना।
- भारत की ‘संचित निधि’ (Consolidated Fund) किस अनुच्छेद में है? 👉 अनुच्छेद 266।
- भारत की ‘आकस्मिक निधि’ (Contingency Fund) किस अनुच्छेद में है? 👉 अनुच्छेद 267 (यह राष्ट्रपति के नियंत्रण में होती है)।
- ‘नीति कटौती प्रस्ताव’ (Policy Cut Motion) का क्या अर्थ है? 👉 मांग की राशि को घटाकर ₹1 कर देना (नीति की अस्वीकृति)।
(E) प्रस्ताव और संकल्प (Motions & Resolutions)
- अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion) किस सदन में लाया जाता है? 👉 केवल लोकसभा में।
- अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए कितने सदस्यों का समर्थन चाहिए? 👉 50 सदस्यों का।
- यदि अविश्वास प्रस्ताव पास हो जाए, तो क्या होगा? 👉 पूरी सरकार (PM सहित) को इस्तीफा देना पड़ेगा।
- ‘निंदा प्रस्ताव’ (Censure Motion) और अविश्वास प्रस्ताव में मुख्य अंतर क्या है? 👉 निंदा प्रस्ताव पास होने पर सरकार को इस्तीफा नहीं देना पड़ता, जबकि अविश्वास प्रस्ताव पर देना पड़ता है।
- राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद कौन सा प्रस्ताव पास होना जरूरी है? 👉 धन्यवाद प्रस्ताव (Motion of Thanks)। (फेल हुआ तो सरकार गिर जाएगी)।
- ‘विशेषाधिकार प्रस्ताव’ (Privilege Motion) किसके खिलाफ लाया जाता है? 👉 उस मंत्री के खिलाफ जिसने संसद में गलत या अधूरी जानकारी दी हो।
- स्थगन प्रस्ताव (Adjournment Motion) का उद्देश्य क्या है? 👉 सदन का नियमित काम रोककर किसी अविलंबनीय लोक महत्व के मुद्दे पर चर्चा करना।
- संसद में बहस को बीच में रोकने के लिए कौन सा प्रस्ताव आता है? 👉 समापन प्रस्ताव (Closure Motion)।
- ‘कंगारू क्लोजर’ (Kangaroo Closure) क्या है? 👉 केवल महत्वपूर्ण खंडों पर बहस करके बिल पास कर देना।
- क्या सभी संकल्प (Resolutions) प्रस्ताव (Motions) होते हैं? 👉 हाँ।
- क्या सभी प्रस्ताव संकल्प होते हैं? 👉 नहीं।
- गैर-सरकारी संकल्प (Private Member Resolution) किस दिन पेश होता है? 👉 केवल शुक्रवार (Friday) को।
(F) दलबदल कानून (Anti-Defection Law)
- दलबदल कानून किस अनुसूची में है? 👉 10वीं अनुसूची (52वां संशोधन, 1985)।
- दलबदल के आधार पर सांसद की अयोग्यता का फैसला कौन करता है? 👉 सदन का अध्यक्ष (Speaker/Chairman)।
- क्या स्पीकर के फैसले की न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) हो सकती है? 👉 हाँ (किहोतो होलोहन केस 1992 के बाद)।
- कितने सदस्यों के टूटकर अलग होने पर दलबदल नहीं लगता? 👉 कम से कम 2/3 सदस्य (91वां संशोधन 2003)।