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संसद (Part – 3) संसदीय समितियां (Parliamentary Committees) – Complete Notes in Hindi

संसद (Part – 3) संसदीय समितियां (Parliamentary Committees) – Complete Notes in Hindi

संसदीय समितियां

दोस्तों, संसद के पास बहुत काम होता है लेकिन समय बहुत कम (साल में सिर्फ कुछ महीने)। संसद हर बिल या बजट की बारीकी से जांच नहीं कर सकती। इसलिए संसद अपना बहुत सा काम संसदीय समितियां (Parliamentary Committees) के जरिए करवाती है। इन्हें ‘संसद की आंखें और कान’ कहा जाता है।

ये कमेटियां छोटे कमरों में बैठक करती हैं, एक्सपर्ट्स को बुलाती हैं और सरकार के कामकाज का ‘पोस्टमार्टम’ करती हैं।

1. समितियों के प्रकार (Types of Committees)

संसद में मुख्य रूप से दो तरह की समितियां होती हैं:

  1. स्थायी समितियां (Standing Committees): ये परमानेंट होती हैं। हर साल इनका गठन होता है। (जैसे- लोक लेखा समिति)।
  2. तदर्थ समितियां (Ad-hoc Committees): ये टेम्परेरी होती हैं। किसी खास मकसद (जैसे किसी घोटाले की जांच) के लिए बनती हैं और काम खत्म होते ही खत्म हो जाती हैं।

2. तीन प्रमुख वित्तीय समितियां (The Big 3 Financial Committees)

(ये समितियां सरकार के खर्चों पर नजर रखती हैं)

(A) प्राक्कलन समिति (Estimates Committee)

यह संसद की सबसे बड़ी समिति है।

  • स्थापना: 1950 में (जॉन मथाई की सिफारिश पर)।
  • सदस्य: 30 सदस्य
  • खास बात: इसके सभी 30 सदस्य लोकसभा से होते हैं। (इसमें राज्यसभा का कोई सदस्य नहीं होता)।
  • काम: यह बजट में ‘मितव्ययिता’ (Economy) लाने का सुझाव देती है। यानी यह बताती है कि सरकार फिजूलखर्ची कैसे कम करे।
  • अध्यक्ष: हमेशा सत्ता पक्ष (Ruling Party) का होता है।

(B) लोक लेखा समिति (PAC – Public Accounts Committee)

यह सबसे पुरानी और सबसे महत्वपूर्ण समिति है।

  • स्थापना: 1921 में (1919 के एक्ट के तहत)।
  • सदस्य: 22 सदस्य (15 लोकसभा + 7 राज्यसभा)।
  • काम: यह CAG (कैग) की रिपोर्ट की जांच करती है। यह देखती है कि सरकार ने जनता का पैसा सही जगह खर्च किया या घोटाला किया।
  • अध्यक्ष: 1967 से यह परंपरा है कि इसका अध्यक्ष विपक्ष का नेता (Opposition Leader) होता है।
  • उपनाम: इसे ‘प्राक्कलन समिति की जुड़वा बहन’ (Twin Sister) कहा जाता है।

(C) लोक उपक्रम समिति (Committee on Public Undertakings – COPU)

  • स्थापना: 1964 में (कृष्ण मेनन समिति की सिफारिश पर)।
  • सदस्य: 22 सदस्य (15 लोकसभा + 7 राज्यसभा)।
  • काम: यह सरकारी कंपनियों (PSUs) जैसे- LIC, Air India, BSNL, SBI के खातों की जांच करती है कि वे फायदे में हैं या नुकसान में।

3. अन्य महत्वपूर्ण समितियां (Other Committees)

(A) विभागीय स्थायी समितियां (Departmental Standing Committees – DRSCs)

संसद में कुल 24 विभागीय समितियां हैं।

  • काम: बजट पेश होने के बाद, ये समितियां अलग-अलग मंत्रालयों (रेल, रक्षा, कृषि आदि) की मांगों की गहराई से जांच करती हैं।
  • सदस्य: हर समिति में 31 सदस्य होते हैं (21 लोकसभा + 10 राज्यसभा)।

(B) कार्य मंत्रणा समिति (Business Advisory Committee)

  • काम: यह तय करती है कि संसद में आज क्या काम होगा और किस बिल पर कितना समय देना है।
  • अध्यक्ष: लोकसभा में इसके अध्यक्ष स्पीकर होते हैं।

(C) विशेषाधिकार समिति (Privileges Committee)

  • काम: अगर कोई मंत्री या सांसद सदन के नियमों को तोड़ता है या गलत जानकारी देता है, तो यह समिति उसकी जांच करती है।

4. तुलनात्मक चार्ट (Comparison Table)

(इसे रट लें, 100% सवाल यहीं से आएगा)

समिति का नामकुल सदस्यलोकसभा सेराज्यसभा सेमुख्य कार्य
प्राक्कलन समिति (Estimates)30300फिजूलखर्ची रोकना (सबसे बड़ी समिति)।
लोक लेखा समिति (PAC)22157CAG रिपोर्ट की जांच (अध्यक्ष: विपक्ष)।
लोक उपक्रम समिति (COPU)22157सरकारी कंपनियों (PSU) की जांच।

नोट: कोई भी मंत्री (Minister) इन समितियों का सदस्य नहीं बन सकता। (क्योंकि समितियां सरकार की जांच करती हैं, और मंत्री खुद सरकार होते हैं)।

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(संसदीय समितियों का पूरा निचोड़)

(A) सदस्यों की संख्या और संरचना

  1. संसद की सबसे बड़ी समिति कौन सी है? 👉 प्राक्कलन समिति (Estimates Committee) – 30 सदस्य।
  2. वह कौन सी समिति है जिसमें राज्यसभा का कोई सदस्य नहीं होता? 👉 प्राक्कलन समिति (सभी 30 लोकसभा से)।
  3. लोक लेखा समिति (PAC) में कुल कितने सदस्य होते हैं? 👉 22 (15 लोकसभा + 7 राज्यसभा)।
  4. लोक उपक्रम समिति (COPU) का गठन किसकी सिफारिश पर हुआ था? 👉 कृष्ण मेनन समिति (1964)।
  5. विभागीय स्थायी समितियों (DRSCs) की कुल संख्या कितनी है? 👉 24 समितियां।
  6. विभागीय समितियों में कितने सदस्य होते हैं? 👉 31 (21 लोकसभा + 10 राज्यसभा)।
  7. क्या कोई मंत्री संसदीय समिति का सदस्य बन सकता है? 👉 नहीं, बिल्कुल नहीं।

(B) कार्य और अध्यक्ष

  1. लोक लेखा समिति (PAC) का अध्यक्ष कौन होता है? 👉 विपक्ष का नेता (परंपरा के अनुसार)।
  2. ‘प्राक्कलन समिति की जुड़वा बहन’ किसे कहा जाता है? 👉 लोक लेखा समिति (PAC) को।
  3. CAG (कैग) की रिपोर्ट की जांच कौन सी समिति करती है? 👉 लोक लेखा समिति।
  4. CAG को किस समिति का ‘मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शक’ (Guide & Friend) कहा जाता है? 👉 लोक लेखा समिति का।
  5. प्राक्कलन समिति का मुख्य कार्य क्या है? 👉 प्रशासन में मितव्ययिता (Economy) यानी कम खर्चे का सुझाव देना।
  6. कार्य मंत्रणा समिति (Business Advisory) का अध्यक्ष कौन होता है? 👉 लोकसभा में स्पीकर और राज्यसभा में सभापति।
  7. संसद की सबसे पुरानी समिति कौन सी है? 👉 लोक लेखा समिति (1921 में बनी थी)।
  8. सरकारी आश्वासनों संबंधी समिति का क्या काम है? 👉 यह देखना कि मंत्रियों ने संसद में जो वादे किए थे, वे पूरे हुए या नहीं।
  9. तदर्थ समिति (Ad-hoc Committee) का क्या अर्थ है? 👉 वह समिति जो किसी विशेष उद्देश्य के लिए बनाई जाए और काम खत्म होने पर समाप्त हो जाए। (उदाहरण: बोफोर्स घोटाले के लिए बनी जेपीसी)
  10. JPC (संयुक्त संसदीय समिति) क्या है? 👉 जब किसी बड़े घोटाले (जैसे 2G, शेयर बाजार) की जांच के लिए लोकसभा और राज्यसभा के सदस्यों को मिलाकर कोई टेम्परेरी समिति बनाई जाती है।