राज्यपाल (Governor)[Articles 153-162] – Complete Study Notes in Hindi
दोस्तों, अब हम संविधान के भाग-6 (Part-VI) में प्रवेश कर रहे हैं। क्या आप जानते हैं कि राज्यपाल की “दोहरी भूमिका” (Dual Role) होती है? अक्सर परीक्षा में सवाल आता है कि “क्या राज्यपाल मृत्युदंड को माफ़ कर सकता है?” या “एक व्यक्ति कितने राज्यों का राज्यपाल बन सकता है?” आज हम अनुच्छेद 153 से […]
Supreme Court of India: भारत का उच्चतम न्यायालय (Articles 124-147) – Complete Notes in Hindi
दोस्तों, भारत में कानून बनाने का काम संसद का है, उसे लागू करने का काम सरकार का है, लेकिन कानून सही है या गलत, यह तय करने का काम ‘भारत का उच्चतम न्यायालय’ (Supreme Court) का है। इसे ‘संविधान का संरक्षक’ (Guardian of the Constitution) कहा जाता है। अगर सरकार आपसे आपके अधिकार छीने, तो […]
संसद (Part – 3) संसदीय समितियां (Parliamentary Committees) – Complete Notes in Hindi
दोस्तों, संसद के पास बहुत काम होता है लेकिन समय बहुत कम (साल में सिर्फ कुछ महीने)। संसद हर बिल या बजट की बारीकी से जांच नहीं कर सकती। इसलिए संसद अपना बहुत सा काम संसदीय समितियां (Parliamentary Committees) के जरिए करवाती है। इन्हें ‘संसद की आंखें और कान’ कहा जाता है। ये कमेटियां छोटे […]
Parliament of India (Part-2): संसद के सत्र, कार्यवाही और विधायी प्रक्रिया – Complete Notes in Hindi
दोस्तों, संसद भवन सिर्फ ईंट-पत्थर की इमारत नहीं है, यह लोकतंत्र का मंदिर है। लेकिन इस मंदिर में काम कैसे होता है? वहां दिन भर क्या होता है? (प्रश्न काल/शून्य काल)। अक्सर एग्जाम में “स्थगन और सत्रावसान में अंतर” या “शून्य काल क्या है” जैसे सवाल पूछे जाते हैं। आज के इस पोस्ट में हम […]
Parliament of India (Part-1): भारतीय संसद (Articles 79-81) – Study Notes in Hindi
दोस्तों, भारत में कानून बनाने वाली सबसे बड़ी संस्था ‘संसद’ (Parliament) है। संविधान के भाग-5 में अनुच्छेद 79 से 122 तक संसद का वर्णन है। अक्सर लोग सोचते हैं कि संसद का मतलब सिर्फ लोकसभा और राज्यसभा है। लेकिन अनुच्छेद 79 साफ कहता है कि: “भारत की संसद तीन अंगों से मिलकर बनेगी: राष्ट्रपति + […]
Attorney General of India: भारत का महान्यायवादी (Article 76) | Complete Notes in Hindi
दोस्तों, जैसे हमें कानूनी मामलों के लिए वकील की जरूरत पड़ती है, वैसे ही भारत सरकार को भी कोर्ट में अपना पक्ष रखने के लिए एक वकील की जरूरत होती है। इसी ‘सरकारी वकील’ को संविधान में ‘भारत का महान्यायवादी’ (Attorney General) कहा जाता है। यह भारत का सर्वोच्च विधि अधिकारी (Highest Law Officer) होता […]